"धान...धान...धान छै, भैया कोठी धान छै। चुगिला कोठी भुस्सा छै...
"धान...धान...धान छै, भैया कोठी धान छै।
चुगिला कोठी भुस्सा छै,
भैया मुख पान छै,चुगिला मुख अंगोर ढारू हे..।"
"मिथिलाक पावनि #सामा_चकेवा
भाइ-बहीनक स्नेह आ पति-पत्नीक स्वधर्म निर्वहनसँ जुड़ल सामा-चकेवा पावनि मिथिलाक गाम-घरमे अदौ कालसँ मनाओल जा रहल अछि।
खरना दिनसँ माटिक सामा-चकेवा बनब शुरू भऽ जाइए एवम् परणा दिनसँ साँझ होइतहिं गाम-घरक आंगनमे भगवान आ भाइ-बहीनक गीत-नाद प्रारंभ भऽ जाइत अछि।
पद्मपुराणमे सूत-सोन संवादक रूपमे सामा-चकेवा कथाक उल्लेख अछि। कथाक अनुसार-
भगवान श्रीकृष्ण अपन पुत्री सामाकेँ चूड़क( चुगिला) द्वारा झूठ शिकायत कएलापर पक्षी बनि वृन्दावनमे विचरण करबाक श्राप देने छला। एकर जानकारी भेटला उपरांत हुनक पति चारूवत्र सेहो भगवान शंकरसँ पक्षी बनक वरदान पावि वृन्दावनमे हुनका संग विचरण करऽ लगला।
ई जानकारी जखन हुनक भाय साम्बकेँ भेटल तऽ ओ भगवान विष्णुक अराधना कऽ अपन बहीन-बहिनोइकेँ श्राप मुक्त करा मनुष्य रूप देबाक वरदान प्राप्त कयलनि। ताहि दिनसँ मिथिलामे ई पर्व मनाओल जा रहल अछि। एहि पावनिमे झूठ शिकायत करबाक कारणे चूड़क(चुगिला)क अग्नि दहन कएल जाइत अछि।
माटिक सामा,चकेवा,साम्ब,सप्तॠषि,चूड़क(चुगिला) आदि-आदि बनाओल जाइत अछि आ गामक स्त्रीगण सभ एक सप्ताह तक विभिन्न गीत-नादक संग भाय-बहीन,पति-पत्नीक आयु आ अपन सोहाग लेल भगवानसँ प्रार्थना करैत छथि। एकर समापन कार्तिक पूर्णिमा दिन बहीन अपन भायकेँ फाँड़मे नवका चूड़ा-गुड़ दऽ सामा-चकेवाकेँ जोतल खेतमे भसा कऽ करैत छथि। मुदा दुक्खक बात जे आब ई पावनि मिथिलोमे अपन अस्तित्वक लड़ाई लड़ि रहल अछि। जे हमर संस्कृति लेल नीक नै अछि।अस्तु।
सामा-चकेवा पावनिक सभ मिथिला वासी,प्रवासीकेँ अशेष शुभकामनाक संग पुनश्च-
साम-चक,साम-चक अबिहँहे,जोतला खेतमे भसिहँहे...............................।
जय मिथिला!
जय मैथिली!
मैथिल विनय
१५-११-२०१८
View more on Facebook
- ← गौर र चन्द्रपुर नपाको दमकलको सरहानिय काम कटहरिया नगरपालिका व...
- "धान...धान...धान छै, भैया कोठी धान छै। चुगिला कोठी भुस्सा छै... →
Leave a Message